कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से बचें, करें नाग पंचमी पर यह उपाय


नाग पंचमी
के दिन प्रात:काल स्नान करने के उपरांत शुद्ध होकर यथाशक्ति (स्वर्ण, रजत, ताम्र) 2 नागों की प्रतिष्ठा कर उनका धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करना चाहिए। तत्पश्चात 'सर्पसूक्त' से प्रतिष्ठित नागों का दुग्धाभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के पश्चात हाथ जोड़कर निम्न प्रार्थना करनी चाहिए।


अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।

शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।

 

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात: काले विशेषत:।

तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

 

उक्त प्रार्थना करने के बाद पूर्ण श्रद्धाभाव से प्रणाम कर एक नाग को किसी भी शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए तथा दूसरे नाग को दूध से भरे दोने (पात्र) में रखकर किसी पवित्र नदी या बहते जल में निम्न विसर्जन प्रार्थना से प्रवाहित करना चाहिए।

 

विसर्जन प्रार्थना-

 

सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।

ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता:।।

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।

ये च वापीतड़ागेषु तेषु सर्वेषु वै नम'।।

 

जिन जातकों की जन्म पत्रिका में 'कालसर्प' दोष हो, उन जातकों को 'नाग पंचमी' वाले दिन उक्त पूजा अवश्य करनी चाहिए। नाग पंचमी वाले दिन 'कालसर्प' दोष निवारण पूजा करने से विशेष लाभ होता है।