महिला ने दस करोड़ ग्राहकों के डाटा में लगाई सेंध, बैंकिंग क्षेत्र में डाटा चोरी का सबसे बड़ा मामला

वाशिंगटन। क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले अमेरिका के तीसरे सबसे बड़े बैंक कैपिटल वन के ग्राहकों का डाटा चोरी होने का बड़ा मामला सामने आया है। एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बैंक का सर्वर हैक कर दस करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के निजी डाटा में सेंध लगा दी। इसे बैंकिंग क्षेत्र में डाटा चोरी के सबसे बड़े मामलों में गिना जा रहा है। डाटा चोरी को अंजाम देने वाली महिला पेज थॉमसन (33) को गिरफ्तार कर लिया गया है।


अमेरिकी अभियोजकों ने सोमवार को बताया कि सिएटल की रहने वाली थॉमसन कैपिटल वन के डाटाबेस का संचालन करने वाली अमेजन वेब सर्विसेज के लिए काम कर चुकी है। उसने इसी डाटाबेस में सेंधमारी कर ग्राहकों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाई। कैपिटल वन के अनुसार, थॉमसन ने एक लाख 40 हजार सोशल सिक्योरिटी नंबर और 80 हजार बैंक अकाउंट नंबरों की चोरी की।


इसके अलावा क्रेडिट कार्ड के लिए आए करोड़ों आवेदनों की भी चोरी हुई। ये आवेदन 2005 से 2019 के बीच दाखिल किए गए थे। बैंक ने हालांकि कहा, 'हमारा मानना है कि जानकारी का उपयोग धोखाधड़ी के लिए नहीं किया गया। इसका प्रसार किए जाने की भी संभावना कम है।' कैपिटल वन ने यह भी बताया कि डाटा चोरी से उसे 15 करोड़ डॉलर (करीब एक हजार करोड़ रुपये) की चपत लगेगी।


ऐसे हुई हैकर की पहचान


अभियोजकों के अनुसार, महिला की पहचान तब हुई, जब उसने सोशल मीडिया पर एक बिल का फोटो पोस्ट किया। उसे यह बिल अपने पालतू जानवरों की देखभाल करने वाले एक पशु चिकित्सक की ओर से मिला था। उसे अपने अपराध के लिए कोई पछतावा नहीं है।


डाटा तक इस तरह बनाई पहुंच


डाटा चोरी की जांच करने वाले एफबीआइ के अधिकारी ने बताया कि यह सबकुछ एक वेब एप्लीकेशन के फायरवाल के कांफिगरेशन में आई गड़बड़ी के चलते हुआ। इसी से थॉमसन संवेदनशील डाटा तक पहुंच बनाने में सफल हुई। अमेजन ने कहा है कि ग्राहक अपने एप्लीकेशन को पूरी तरह नियंत्रित करते हैं। जबकि कैपिटल वन ने कहा कि कांफिगरेशन की गड़बड़ी को दूर कर लिया गया है।


घर से डिजिटल डिवाइस बरामद


एफबीआइ के अधिकारियों ने सोमवार को थॉमसन के घर पर छापा मारा। उसके घर से कई डिजिटल डिवाइस बरामद हुईं। इनमें कैपिटल वन से संबंधित कई अहम जानकारियां मिलीं।


2017 में चोरी हुई थी 14.7 करोड़ ग्राहकों की जानकारी


2017 में अमेरिका की क्रेडिट-रिपोर्टिग कंपनी इक्विफैक्स इंक के डाटा में सेंध लगी थी। तब करीब 14.7 करोड़ लोगों की जानकारी चोरी हुई थी। इस कंपनी ने पिछले हफ्ते बताया था कि डाटा चोरी के इस मामले के निपटारे के लिए उसे 70 करोड़ डॉलर (करीब 4800 करोड़ रुपये) का भुगतान करना पड़ेगा।