आम सैनिकों की तरह तैनात हैं धोनी, उठाना पड़ रहा है इतना वजन

 


भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों तक ले जाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के जीवन का नया अध्याय शुरू हो चुका है। अब भारत मां के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए धोनी श्रीनगर पहुंचकर भारतीय सेना की ड्यूटी को ज्वांइन कर चुके हैं। बता दें कि धोनी टेरिटोरियल आर्मी में दक्षिण कश्मीर में सेना का हिस्सा बन चुके हैं। धोनी को 2011 में सेना में लेफ्टिनेंट कर्नर की मानद् रैंक दी गई थी। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक धोनी 106 क्षेत्रीय सेना बटालियन (पैरा) के साथ 31 जुलाई से 15 अगस्त तक रहेंगे। वह इस दौरान पेट्रोलिंग, गार्ड और पोस्ट पर तैनाती देंगे। गुरुवार को ट्रेनिंग शुरू होने के साथ ही महेंद्र सिंह धोनी की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल  हो गई। इस फोटो में धोनी अपने दल के साथियों के साथ मौजूद थे, जिसकी खासा वाहवाही हो रही है। फोटो में देखा जा सकता है कि धोनी के हाथ में क्रिकेट बैट है जिस पर वह ऑटोग्राफ दे रहे हैं।


बहुत समय पहले धोनी ने अपनी रेजीमेंट से वादा किया था कि वह समय निकालकर उनके साथ ट्रेनिंग करेंगे और सैनिकों की तरह जीवन यापन करेंगे। लेकिन क्रिकेट की वजह से उन्हें वक्त ही नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में महेंद्र सिंह धोनी ने खुद को वेस्ट इंडीज दौरे से अलग हो गए। फिर क्या था उन्हें अपना वादा याद आया और वह निकल पड़े भारत मां की रक्षा के लिए...


अभी धोनी को सेना की बुनियादी ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसमें उन्हें फौज और फायरिंग के बारे में सिखाया जाएगा। धोनी 50-50 सैनिको के साथ बैरक में रहेंगे, एक सैनिक की तरह आम क्यूबिकल में ही नहाएंगे और दिन-रात की शिफ्ट में काम करेंगे। धोनी को ड्यूटी के वक्त 19 किलो वजन लेकर पेट्रोलिंग करनी होगी। 19 किलो वजन में राइफल की मैगजिन (3 किलो) वर्दी का वजन ( 3 किलो), जूते का वजन (3 किलो), ग्रेनेड (4 किलो), हेलमेट (1 किलो) और बूलेट प्रूफ जैकेट (4 किलो) की शामिल हैं।


धोनी की ज्वाइनिंग पर बोले थे सेना प्रमुख


थलसेना प्रमुख बिपिन रावत ने महेंद्र सिंह धोनी द्वारा भारतीय सेना से जुड़ने के विचार पर कहा था कि धोनी ड्यूटी के दौरान उसी तरह देश के नागरिकों की सुरक्षा करेंगे, जैसे एक सामान्य सैनिक करता है। इस दौरान उन्हें किसी भी तरह की अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत नहीं है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय क्रिकेट को शिखर तक ले जाने वाले धोनी अपनी पूरी ताकत और हिम्मत के साथ देश की सेवा करेंगे और वह इस रास्ते पर भी कामयाबी हासिल करेंगे।


धोनी के श्रीनगर पहुंचने पर सेना के एक अधिकारी ने कहा बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल धोनी यहां पहुंच चुके हैं और यूनिट से जुड़ गए हैं। इसी के साथ उनकी यूनिट आतंकवाद प्रभावित दक्षिण कश्मीर में विक्टर फोर्स के साथ जुड़ेगी। आपको बता दें कि 2011 में विश्व कप जीताने वाले कप्तान धोनी के सेना को दो सप्ताह सेवाएं देने के अनुरोध को पिछले सप्ताह ही सेना मुख्यालय ने मंजूरी दी थी।


जब दिल में हो इंडियन ऑर्मी


साल 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सेना को मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी थी। हालांकि वे ऐसा सम्मान प्राप्त करने वाले दूसरे कप्तान हैं। इससे पहले सेना ने यह सम्मान भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव को दिया था। इतना ही नहीं इसके बाद धोनी ने पैराट्रूपिंग की ट्रेनिंग ली और सभी पांचों छलांग लगाकर प्रतीक चिह्न लगाने की योग्यता प्राप्त की। 


दरअसल धोनी ने पैरा बेसिक कोर्स किया और आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल में उन्होंने भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान से अपनी पांचवीं छलांग लगाई थी जिसके बाद उन्हें बैज लगाने का अधिकार प्राप्त हुआ। लेकिन सेना द्वारा सीधेतौर पर यह कह देना कि धोनी ने जो बैज लगाया हुआ है उसे बलिदान बैज कहना गलत है। इससे ग्लव्स में बैज को लेकर जारी विवाद समाप्त हो जाता है। हालांकि अब आईसीसी को भी इस बात को मान लेना चाहिए कि यह नियमों का उल्लघंन नहीं है और धोनी को इस तरह के चिह्न को लगाने की अनुमति प्रदान करना चाहिए।