पटना में बाढ़ का जिम्मेदार कौन? प्रकृति की मार या फेल सरकार

पिछले 7 दिनों से बिहार के कुछ हिस्से भयंकर जल जमाव की चपेट में है। लगातार हुई बारिश ने यहां का हाल बेहाल कर रखा है लेकिन सबसे खस्ताहालत राजधानी पटना की है जो स्मार्ट सिटी की सूची में अग्रणी श्रेणी में है। बारिश तो थम गई है और धूप भी निकलने लगी पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। राजधानी पटना के दो इलाके कंकरबाग और राजेंद्र नगर के कई इलाकों में अभी भी लगभग 5 फीट तक जलजमाव है। इन सबके बीच वहां अब महामारी का भी खतरा बढ़ने लगा है और लोगों का गुस्सा सरकार पर फूट रहा है। सरकार लगातार दावा कर रही है कि राहत और बचाव कार्य जोरों पर चल रहा है लेकिन कई लोगों को कहना है कि उनके पास अब तक कोई नहीं पहुंचा है। लेकिन इस जलजमाव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन की पोल खोल कर रख दी है। हर तरफ उनकी किरकिरी हो रही है और हाल अब ऐसा हो गया है कि उनके अपने भी इसका दोषारोपण उन्हीं पर कर रहे हैं। बिहार NDA में शामिल भाजपा के कुछ नेताओं इसका ने ठीकरा नीतीश कुमार पर ही फोड़ना शुरू कर दिया है। हालांकि नीतीश के मंत्रिमंडल में शामिल भाजपा नेता खामोशी बरते हुए हैं। उधर नीतीश कुमार के अपने अलग दावे हैं। नीतीश इस जलजमाव का ठीकरा कभी हथिया नक्षत्र पर फोड़ते हैं तो कभी क्लाइमेट चेंज का बहाना मार जाते हैं। नीतीश यह भी दावा करते दिख रहे हैं कि गंगा में पानी बढ़ जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इंजीनियरिंग के छात्र रहे नीतीश से ऐसा जवाब सुनकर हंसी भी आती है और रोना भी आता है। हंसी इसलिए आती है कि पढ़ा लिखा व्यक्ति किस तरीके की बातें कर रहा है और रोना इसलिए भी आता है कि आजादी के 70 साल बाद भी हम ऐसी परिस्थितियों से निपटने में अक्षम हैं। लेकिन अंदर ही अंदर वह यह भी मान रहे हैं कि कहीं ना कहीं लापरवाही की वजह से जलजमाव की स्थिति पटना में उत्पन्न हुई है। तभी तो वे यह भी कह रहे हैं कि स्थिति से निपटने के बाद सभी लोगों से हिसाब लिया जाएगा। पर स्थानीय लोग यह मानते हैं कि पटना का ये हाल बंद नालों की वजह से है जिसपर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। नीतीश कुमार का ज्ञान सबसे ज्यादा मीडिया के खिलाफ निकल रहा है और मीडिया कवरेज को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए वह यहां तक कह दे रहे हैं कि यह अज्ञानी लोग हैं। भड़के नीतीश ने यह भी कह दिया कि बारिश अकेले सिर्फ आपके यहां ही नहीं हुई है. बताइये! अमेरिका में बारिश के बाद क्या हुआ था। हालांकि नीतीश हालात का जायजा लेने के लिए खुद प्रभावित जगहों का मुआयना कर रहे हैं, बैठकें भी जारी हैं लेकिन जमीन पर वो चीजें उतरते नहीं दिख रही है। लोगों के पास खाने को नहीं है, लोग प्यासे मर रहे हैं, अस्पतालों में मरीज दम तोड़ रहे हैं, अपने ही शहर में लोग होटलों में रहने के लिए मजबूर हो रहे हैं लेकिन स्थितियों में बहुत ज्यादा सुधार होता दिख नहीं रहा है। सीधा सवाल नीतीश के 14 सालों के शासन पर उठा रहा है, सीधा सवाल उनके सुशासन के दावे पर उठ रहा है और सीधा सवाल उनके विकास पुरुष होने पर भी उठ रहा है। अब तो यह कहा जाने लगा है कि आखिर इन 15 सालों में नीतीश ने क्या किया? ऐसे सवालों को सुन नीतीश गुस्से से लाल हो जा रहे हैं और यह कहना शुरू कर रहे हैं कि मेरे जैसे व्यक्ति को डुबाने के लिए जो करना है करिए लेकिन जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, हर चीज की एक मर्यादा होती है, जिसका ख्याल रखना चाहिए। बहरहाल, जो थोड़ी बहुत चीजें हो रही हैं उसके श्रेय लेने की होड़ ही मची हुई है या फिर इसका फोटो सेशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 


एक और चीज जो देखने में आ रही है वह यह है कि केंद्रीय मंत्री के अपने अलग दावे है तो राज्य सरकार अपने अलग दावे कर रही है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद आनन-फानन में बारिश के 3 दिन बाद पटना पहुंचते हैं और राहत और बचाव कार्य पर ध्यान देने की बात करते हैं। वह यह भी कहते हैं कि केंद्र सरकार हर तरह से राज्य सरकार के साथ है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एयर फोर्स अपने काम में लगे हुए हैं। रविशंकर प्रसाद बाढ़ के हालात का जायजा लेने वक्त खूब फोटों भी खिंचवा रहे हैं और उसे सोशल मीडिया पर भी डाल रहे हैं। वहीं नीतीश और उनकी पार्टी लगातार यह कह रही है कि राज्य सरकार पूरे तरीके से इस स्थिति से निपट रही है। नीतीश यह दावा कर रहे हैं कि पानी निकालने के लिए इंतजाम किये जा रहे हैं और बाहर से मशीनें मंगाई जा रही है। रविशंकर भी यही दावे कर रहे हैं। बुधवार शाम फोटों खींचाने के चक्कर में पाटलिपुत्र से सांसद रामकृपाल यादव बाढ़ की पानी में गिर गए। खैर, सरकार में बैठे लोग अपने-अपने दावे कर रहे हों पर भुगतना आम जनता को पड़ रहा है।