अयोध्या के व्यापारी क्यों चाहते हैं कि हो फैसले में थोड़ी देरी?


अयोध्या मुद्दे पर नवंबर में किसी भी दिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है। इसको लेकर पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है और इन सबसे अधिक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस किसी भी प्रकार की चूक नहीं छोड़ना चाहती है।
अयोध्या को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया है, लेकिन अयोध्या में इतना कुछ होने के बाद भी रोजमर्रा के जीवन पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। आराम से रोज की तरह व्यापारी घर से निकलता है और शाम को घर वापस जाता है।


अयोध्या के व्यापारी नेता रामकुमार गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों का तो कहना है कि हो सके तो फैसले की तारीख को कुछ दिन और बढ़ा देना चाहिए। इसके पीछे की मुख्य वजह 5 नवंबर से शुरू होने वाला परिक्रमा मेला है और इस मेले में दूरदराज से लोग रामनगरी में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और घाट पर स्नान भी करते हैं। इसके पश्चात मंदिर के दर्शन के लिए जाते हैं।



इस बार नाकेबंदी के बीच भी रामनगरी में बड़ी संख्या में भक्त बेखौफ आ रहे हैं और 5 नवंबर से शुरू होने जा रहे परिक्रमा मेले पर अयोध्या फैसले की आशंकाओं का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। बिना किसी डर के अयोध्या की रामनगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ रही है और सरयू घाटों से लेकर मंदिरों तक भक्तों का तांता बताता है कि अयोध्या तमाम आशंकाओं के बीच भी अपनी पूरी रौ में है। इसके चलते यहां के व्यापारी व व्यापारी नेता चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय जो भी हो, लेकिन मेला समाप्त होने के बाद फैसला आए तो बेहतर रहेगा क्योंकि परिक्रमा मेला व पूर्णिमा स्नान में लगभग 25 लाख भक्त आते हैं। अयोध्यावासियों का आर्थिक ढांचा भी काफी हद तक मेले व पूर्णिमा स्नान पर ही निर्भर है, इसलिए मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के चलते ही दुकानदारों की रोजी- रोटी चलती है। उधर जिला और पुलिस प्रशासन भी कार्तिक पूर्णिमा एवं परिक्रमा मेले की तैयारियों में जुटे हैं। कार्तिक परिक्रमा एवं पूर्णिमा मेला 5 नवंबर से शुरू होकर 12 नवंबर तक चलेगा।