किस राज्य या शहर में कैसे मनाते हैं होली, जानिए


होली, धुलेंडी और रंगपंचमी यह उत्सव दुनियाभर में विभिन्न नाम और रूप में मनाया जाता है। भारत के प्रत्येक राज्य में होली को अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है और इसे मनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। आओ जानते हैं कि किस राज्य शहर में कैसे मनाते हैं होली।


1. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश : बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में होली को फगुआ या फाग कहा जाता है। यहां के कई शहरों में रंगों वाली होली के साथ ही लठमार होली खेलने का प्रचनल भी है। खासकर मथुरा, नंदगांव, गोकुल, वृंदावन और बरसाना में इसकी धूम रहती है।


2. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान : मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होली वाले दिन होलिका दहन होता है, दूसरे दिन धुलेंडी मनाते हैं और पांचवें दिन रंग पंचमी मनाते हैं। यहां के आदिवासियों में होली की खासी धूम होती है। मध्यप्रदेश में झाबुआ के आदिवासी क्षेत्रों में भगोरिया नाम से होलिकात्वस मनाया जाता है। भगोरिया के समय धार, झाबुआ, खरगोन आदि क्षेत्रों के हाट-बाजार मेले का रूप ले लेते हैं और हर तरफ फागुन और प्यार का रंग बिखरा नजर आता है।


इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में होली को होरी के नाम से जाना जाता है और इस पर्व पर लोकगीतों की अद्भुत परंपरा है। गली गली में नगाडे की थाप के साथ होरी शुरु होती है। बसंत पंचमी को गांव के बईगा द्वारा होलवार ( जहां जलती है होली) में कुकरी (मुर्गी) के अंडे को पूज कर कुंआरी बबूल (बबूल का नया पेड़) की लकड़ी में झंडा बांधकर गाड़ने से फाग उत्सव प्रारंभ होता है। रंग भरी पिचकारियों से बरसते रंगों एवं उड़ते गुलाल में सभी सराबोर हो जाते हैं।


3. महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा : महाराष्ट्र में होली को 'फाल्गुन पूर्णिमा' और 'रंग पंचमी' के नाम से जानते हैं। गोवा के मछुआरा समाज इसे शिमगो या शिमगा कहता है। गोवा की स्थानीय कोंकणी भाषा में शिमगो कहा जाता है। गुजरात में गोविंदा होली की खासी धूम होती है। महाराष्ट्र और गुजरात के क्षेत्रों में गोविंदा होली अर्थात मटकी-फोड़ होली खेली जाती है। इस दौरान रंगोत्सव भी चलता रहता है।
4. हरियाणा और पंजाब : हरियाणा में होली को दुलंडी या धुलेंडी के नाम से जानते हैं। पंजाब में होली को 'होला मोहल्ला' कहते हैं। हरियाणा में होली के दौरान भाभियां अपने प्यारे देवरों को पीटती हैं और उनके देवर सारे दिन उन पर रंग डालने की फिराक में रहते हैं। वहीं, पंजाब में होली के अगले दिन अनंतपुर साहिब में 'होला मोहल्ला' का आयोजन होता है। ऐसा मानते हैं कि इस परंपरा का आरंभ दसवें व अंतिम सिख गुरु, गुरु गोविंदसिंहजी ने किया था।


 


5. पश्चिम बंगाल और ओडिशा : पश्चिम बंगाल और ओडिशा में होली को 'बसंत उत्सव' और 'डोल पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है। डोल पूर्णिमा के अवसर पर भगवान की अलंकृत प्रतिमा की पालकी निकाली जाती है। नाचते गाते और एक दूसरे पर रंग डालते सभी लोग मौत मस्ती करते हैं।