ट्रेनें न चलने पर आंदोलन की धमकी देने वाला गिरफ्तार, ट्वीट करके कहा था- भूखे मरने से अच्छा पैदल गांव जाएंगे

मुंबई. बांद्रा में रेलवे स्टेशन के बाहर मंगलवार शाम को हजारों मजदूरों की भीड़ जमा हो गई थी। कोरोना संक्रमण के इस दौर में जहां सरकार का सोशल डिस्टेंसिंग पर पूरा जोर है। वहां एक साथ बिना किसी सुरक्षा के इतने मजदूरों के सड़कों पर उतर जाने के बाद सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में अफवाह फैलाने के लिए जिम्मेदार मानते हुए नवी मुंबई के एनजीओ संचालक विनय दुबे को गिरफ्तार किया है। बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 21 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।


विनय ने लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए फेसबुक पर कुछ दिन पहले 'चलो घर की ओर' नाम से एक कैंपेन शुरू किया था। उसने इससे जुड़ा एक वीडियो भी बनाया था। अब तक जांच में पता चला है कि विनय के पिता मुंबई में एक ऑटो रिक्शा चालक थे। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर विनय ने खुद को एक उद्यमी और समाजसेवक के रूप में पेश किया है। 


झूठा वीडियो जारी किया, माना जा रहा है, इसीलिए जुटी भीड़


विनय ने महाराष्ट्र में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए 40 बसों का इंतजाम किए जाने की जानकारी एक वीडियो के माध्यम से फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट की थी। माना जा रहा है कि इसी के बाद यह भीड़ अचानक बांद्रा स्टेशन के बहार जमा हुई। इस वीडियो को अब तक कई हजार लोग शेयर और लाइक कर चुके हैं। इस वीडियो में उसने यह भी कहा था कि यह बस सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क रहेगी। 
देशव्यापी आंदोलन की दी थी चेतावनी
विनय ने अपने अकाउंट पर एक और पोस्ट शेयर की थी। इसमें उसने तक ट्रेनें के शुरू न होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इस बीच महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि मीडिया में कहीं-कहीं ये खबरें आईं कि दुबे राकांपा का सदस्य है लेकिन यह पार्टी की छवि खराब करने के लिए बोला गया झूठ और एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने ट्वीट किया, ‘‘हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि विनय दुबे जिसे नवी मुंबई पुलिस ने और बाद में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वह राकांपा का सदस्य नहीं है।’’